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Bihar Prisons and Correctional Services Bill 2026: 132 साल पुराने जेल कानून की होगी विदाई, बिहार में लागू होगा नया सुधारात्मक कानून

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Alam Ki Khabar: बिहार सरकार ने बिहार कारा एवं सुधारात्मक सेवा विधेयक-2026 को मंजूरी दी है। नया कानून लागू होने पर 132 साल पुराने प्रिजन्स एक्ट, 1894 की जगह आधुनिक जेल व्यवस्था लागू होगी।

पटना, 21 जुलाई। आलम की खबर: बिहार सरकार ने राज्य की जेल व्यवस्था को आधुनिक और सुधारात्मक स्वरूप देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में बिहार कारा एवं सुधारात्मक सेवा विधेयक-2026 को मंजूरी दे दी गई। इसके लागू होने के बाद राज्य में लंबे समय से प्रभावी औपनिवेशिक दौर के जेल कानून की जगह नई व्यवस्था लागू होगी, जिसका उद्देश्य केवल कैदियों को बंद रखना नहीं, बल्कि उनके सुधार, पुनर्वास और समाज की मुख्यधारा में पुनर्स्थापित करना है।

अब तक बिहार की जेल व्यवस्था मुख्य रूप से ब्रिटिश शासनकाल के प्रिजन्स एक्ट, 1894 पर आधारित थी। विशेषज्ञों के अनुसार यह कानून उस दौर की प्रशासनिक जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया था, जिसमें जेलों का उद्देश्य बंदियों पर नियंत्रण और दंड तक सीमित था। समय के साथ अपराध की प्रकृति, सुरक्षा चुनौतियां और मानवाधिकारों की अवधारणा बदलने के बावजूद यही कानून लागू रहा। अब सरकार का मानना है कि आधुनिक दौर की आवश्यकताओं के अनुरूप जेल प्रशासन में व्यापक सुधार की जरूरत है।

नया विधेयक केंद्र सरकार के मॉडल प्रिजंस एंड करेक्शनल सर्विसेज एक्ट, 2023 के अनुरूप तैयार किया गया है। इसमें जेलों को सुधार और पुनर्वास केंद्र के रूप में विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया है। बंदियों के लिए कौशल विकास, व्यावसायिक प्रशिक्षण, मानसिक स्वास्थ्य परामर्श, कानूनी सहायता और पुनर्वास कार्यक्रमों का प्रावधान किया गया है ताकि सजा पूरी करने के बाद वे समाज में सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें। साथ ही जेल प्रशासन में आधुनिक तकनीक, डिजिटल निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत बनाने की योजना शामिल है।

सरकार का कहना है कि नए कानून से जेल प्रबंधन अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनेगा। बंदियों के बुनियादी अधिकार, स्वास्थ्य, स्वच्छता और सुरक्षा को बेहतर ढंग से सुनिश्चित किया जाएगा। साथ ही जेल परिसरों में होने वाली अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए आधुनिक संसाधनों का उपयोग किया जाएगा। मंत्रिमंडल की बैठक में इस विधेयक सहित कई अन्य प्रस्तावों को भी मंजूरी मिली, लेकिन सबसे अधिक चर्चा 132 वर्ष पुराने जेल कानून को बदलने के फैसले की हो रही है।

सजा के साथ सुधार भी जरूरी

आधुनिक आपराधिक न्याय व्यवस्था का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि अपराधी को सुधार कर समाज की मुख्यधारा में लौटाना भी है। यदि नया कानून प्रभावी ढंग से लागू होता है तो बिहार की जेलें केवल बंदीगृह नहीं, बल्कि सुधार और पुनर्वास के केंद्र के रूप में नई पहचान बना सकती हैं।

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